"आत्मलोक" क्या है एवं आत्माएँ कैसे यहाँ पहुँचती है |
withrbansal
मृत्यु के बाद हम कहाँ जाते है -
भारतीय दर्शन एवं संस्कृति में आत्मलोक के साथ-साथ कई प्रकार के लोकों यथा देवलोक,पितृलोक, ब्रह्मलोक ,पाताललोक, गोलोक, स्वर्गलोक, नरकलोक आदि की कल्पना की गई है, लेकिन इन सब में आत्मलोक ही एक ऐसा लोक है जिसे पाश्चात्य देशों में भी स्वीकृति प्राप्त होती जा रही है | चावार्क के भौतिकवादी दर्शन को छोड़कर सामान्यतया भारतीय दर्शन में यह माना गया है कि हमारा मात्र भौतिक अस्तित्व ही नश्वर है, आंतरिक सत्व या अभौतिक अस्तित्व शाश्वत है जो कि जन्म-मृत्यु से मुक्त है | "गीता" में भी कहा है- जैसे मनुष्य पुराने वस्त्रो को त्याग कर नए वस्त्रों को ग्रहण करता है, वैसे ही जीवात्मा पुराने शरीर को त्याग कर नया शरीर धारण करता है |
पश्चिम देशों के प्रसिद्ध चिकित्सकों एवं मनोवैज्ञानिक यथा डॉक्टर इयान स्टीवेंसन, डॉक्टर रेमंड मूडी, डॉक्टर माइकल न्यूटन, डॉक्टर ब्रायन वीज आदि द्वारा अपने वैज्ञानिक पद्धति से किए गए अध्ययनों के माध्यम से आत्मा, आत्मलोक एवं पुनर्जन्म के इस चक्र को स्थापित किया गया है | "नियर डेथ एक्सपीरियंस "(NDE ) या "मृत्यु निकट अनुभवों" पर डॉक्टर एलिजाबेथ कुबलर, डॉक्टर रॉस और डॉक्टर मूडी के अध्ययनों में भी मृत्यु उपरांत आत्मा के शरीर से बाहर आकर शरीर के ऊपर हवा में तैरना एवं कुछ क्षणों के उपरांत दूर एक सुरंग के पार एक अलौकिक, दिव्य सफेद प्रकाश का दिखाई देना एवं आत्मा का उसकी ओर आकर्षित होना जैसे अनुभव भी इसकी पुष्टि करते हैं | पढ़े -मृत्यु पूर्व अनुभव : आउट ऑफ़ बॉडी एक्सपीरियंस
एप्पल के फाउंडर "स्टीव जॉब्स" को मृत्यु से कुछ सेकंड पहले" ओह वॉउ ,ओह वॉउ ,ओह वॉउ..... " कहते हुए सुना गया था | यह भी कहीं ना कहीं इसी बात को रेखांकित करता है कि मृत्यु के क्षण उन्हें कोई ना कोई आश्चर्यजनक रूप से सुंदर दृश्य दिखाई पड़ा था और संभावना है कि वह आत्मलोक की ही एक झलक हो | कोमा से लौटकर वापस आए कई व्यक्तियों के अनुभव भी "मृत्यु पूर्व अनुभवों "के समान ही पाए गए हैं जो कि आत्मा और आत्मलोक के अस्तित्व की ही पुष्टि करते हैं | हालांकि कतिपय लोगों के द्वारा इन अनुभवों को "मनोवैज्ञानिक प्रत्यय" बताते हुए इन्हें दिमाग में होने वाले रासायनिक परिवर्तनों की उपज कहा है | लेकिन पश्चिम के प्रसिद्ध चिकित्सा शास्त्री एवं मनोवैज्ञानिक "डॉक्टर माइकल न्यूटन" के द्वारा वर्षों तक किए गए अध्ययनों के द्वारा "आत्मलोक "को एक भव्य,प्रशंसनीय,बेहद अनुशासित एवं निर्देशित स्थान के रूप में स्थापित किया है |
आत्मा के द्वारा भौतिक शरीर का त्याग- मृत्यु के समय आत्मा भौतिक शरीर को त्याग कर एक भव्य एवं प्रज्ञावान प्रकाश ऊर्जा के रूप में उसके ऊपर उठ जाती है | यदि हमारी आत्मा परिपक्व है तो वह देह त्यागने से पहले ही समझ जाती है कि अब घर लौटने का समय आ गया है लेकिन आत्मा यदि युवा या नयी है तो वह थोड़ी भ्रमित सी होती है | अधिकांश आत्माएं मृत्यु स्थल से भौतिक शरीर को छोड़ने के तुरंत पश्चात यात्रा के लिए रवाना हो जाती है, लेकिन कुछ आत्माएं ऐसी होती है जो मृत्यु के बाद भी मृत्यु स्थल के पास कुछ समय रहना चाहती है | इसके कई कारण होते हैं, लेकिन मुख्य कारण यह है कि- आत्मा चाहती है कि आत्मलोक की यात्रा प्रारंभ करने से पूर्व वह अपने पीछे छोड़े गए परिजनों(प्रियजनों ) को सांत्वना या दिलासा दिला जाए | किन्तु ऐसे समय प्रियजनों के सदमे एवं शोक के कारण ग्रहणशीलता बहुत कम हो जाती है जिससे आत्मा को अपने प्रिय जनों से मानसिक संपर्क करने के लिए बहुत सी ऊर्जा लगानी पड़ती है | लेकिन फिर भी प्रयाण करती हुई आत्मा परिजनों को सांत्वना देने का कोई ना कोई रास्ता खोज ही लेती है | यह भी पढ़े -मृत्यु के बाद का सत्य !
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Nice
जवाब देंहटाएंThanx
हटाएंक्या अत्मालोक मे किरादू का rhyming कोई स्थान है
जवाब देंहटाएंबहुत सुंदर
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