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दुःख जीवन का गुप्त कारीगर है | लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

दुःख : जीवन में दुर्भाग्य है या अवसर ?

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Withrbansal  दुःख : दर्द से ही जन्म लेता है जीवन का सबसे बड़ा अर्थ  |   दोस्तों, व्यक्ति के जीवन में कभी ना कभी एक समय ऐसा आता है जब वह अपने आप से रोते हुए यह सवाल पूछता  हैं -- "मेरे साथ ही ऐसा क्यों हुआ है ? "                      दुख जब दस्तक देता है तो वह केवल आंसू ही नहीं लाता है वह शब्दहीन संवाद भी लाता है-- " मैं ही क्यों ? "                          दुख की इन विकट घड़ी में अधिकांश लोग इसी प्रकार के नकारात्मक संवाद स्वयं से करते हैं और उन परिस्थितियों को और ज्यादा खराब कर लेते हैं |                                           जबकि इन स्थितियों में शायद सही सवाल यह होना चाहिए कि- " दुख,तू मुझे क्या सिखाने आया हैं ? "  क्या तू मुझे तोड़ने या बनाने आया है ? और सबसे महत्वपूर्ण -- " तेरे बिना क्या मैं अधूरा रह जाता ? "    ...