आपके साथ वही होता है, जो आपके भीतर बार-बार होता है।
withrbansal क्या हम अपनी नियति साथ लेकर आते हैं ? दोस्तों, एक ऐसा सवाल जो हर इंसान के मन में कभी ना कभी अवश्य उठता है - "मेरे साथ ही ऐसा क्यों होता है ? ", " मैं ना चाहते हुए भी बार-बार वही गलती क्यों करता हूँ ? " कुछ लोग बिना प्रयास आगे बढ़ जाते हैं और कुछ पूरा जीवन संघर्ष में क्यों फँसे रहते हैं ? क्या यहाँ सब कुछ पहले से तय है ? किसी दुर्घटना के बाद, किसी असफलता के बाद, किसी बीमारी, तलाक, या अचानक मिली सफलता के बाद - यह सवाल भीतर से उभरता है - “क्या मैं अपनी नियति साथ लेकर आया हूँ ?” आधुनिक विज्ञान इसे मस्तिष्क की "बायो -केमिकल प्रक्रियाएँ " कहता है। भारतीय दर्शन इसे कर्म, संस्कार और प्रारब्ध कहता है। भाषा अलग है,दृष्टिकोण अलग है। लेकिन आश्चर्यजनक रूप से - निष्कर्ष एक ही है। दोस्तों, आधुनिक न्यूरोसाइंस ( मस्तिष्क की बायो केमिस्ट्री ) एवं भारतीय "कर्म सिद्धांत " देखने में भले ही अलग-अलग लगे लेकिन गहराई में जाकर दोनों एक ही सत्य की ओर इशारा करते है कि - मनुष्य अपने भविष्य का निर्माता स्वयं है | अर्थात हम जैसा सोचते, अनुभव करते और कर्...