जब मृत्यु सामने खड़ी हो ,पॉल कलानिधि से सीखें सार्थक जीवन कैसे जिएँ
withrbansal पॉल कलानिधि - मृत्यु के सामने सार्थक जीवन की खोज, जीवन बदल देने वाली 10 सीख दोस्तों, अगर आपको पता चले कि समय बहुत कम बचा है तो ? कल्पना कीजिए...आपने जीवन के लिए बहुत सारे सपने देखे हैं....आपने पढ़ाई की, मेहनत की, करियर बनाया, परिवार बनाया और भविष्य के लिए योजनाएँ बनाईं। आपको लगता है कि अभी बहुत समय है...रिटायरमेंट के बाद यह करेंगे....कुछ साल बाद यात्रा करेंगे....बच्चों की जिम्मेदारियाँ पूरी होने के बाद अपने लिए जिएँगे......पैसा थोड़ा और हो जाए तो समाज के लिए कुछ करेंगे.....स्वास्थ्य ठीक रहे तो आध्यात्मिक जीवन में आगे बढ़ेंगे। लेकिन एक दिन अचानक डॉक्टर कह दे - “आपको एक गंभीर बीमारी है और आपके पास शायद बहुत अधिक समय नहीं है।” तब क्या होगा ? क्या हमारी प्राथमिकताएँ वही रहेंगी ? क्या पैसा उतना ही महत्वपूर्ण लगेगा ? क्या पद, प्रतिष्ठा, मकान, गाड़ी और सामाजिक पहचान पहले जैसी महत्वपूर्ण रहेंगी ? नहीं ना | ऐसे में उठता है वह सबसे बड़ा प्रश्न - अगर जीवन छोटा हो जाए तो उसे सार्थक कैसे बनाएँ ? अमेरिका के युवा न्यूरोसर्जन " डॉ. पॉल कलानिधि " का जीवन इसी प्रश्न के सामने खड़ा...