हर इंसान की अपनी एक संजीवनी होती है: हनुमान जी से सीखिए संकट में जीवन को फिर से कैसे खड़ा करें |
withrbansal संजीवनी बूटी का रहस्य: क्या मृत्यु को हराने से भी बड़ा था उसका जीवन संदेश ? दोस्तों, जीवन में हर व्यक्ति कभी न कभी ऐसी परिस्थिति में अवश्य पहुँचता है, जहाँ उसे लगता है कि अब सब कुछ समाप्त हो गया। उसी क्षण उसे अपनी 'संजीवनी' खोजनी होती है l याद करें रामायण का वह प्रसंग जब भगवान राम भी असहाय दिखाई दिए…रामायण का यह प्रसंग केवल युद्ध का वर्णन नहीं है, बल्कि मानव जीवन की सबसे बड़ी सच्चाई का प्रतीक भी है। लंका का युद्ध अपने निर्णायक मोड़ पर था। धर्म और अधर्म आमने-सामने खड़े थे। तभी रावण का पुत्र मेघनाद अपनी दिव्य शक्ति का प्रयोग करता है। उसका शक्तिबाण लक्ष्मण को गंभीर रूप से घायल कर देता है। लक्ष्मण भूमि पर गिर पड़ते हैं। उनका शरीर निश्चेष्ट है। श्रीराम अपने प्रिय भाई का सिर गोद में रखे बैठे हैं। पहली बार ऐसा लगता है मानो स्वयं भगवान भी एक भाई के दुःख से व्याकुल हो उठे हों। इसी समय वैद्य सुषेण कहते हैं - "यदि सूर्योदय से पहले संजीवनी औषधि नहीं पहुँची, तो लक्ष्मण को बचाना अत्यंत कठिन होगा।" बस यही वह क्षण था जिसने इतिहास बदल दिया। हनुमान जी बिना एक क्षण गँवाए द्...