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जब मृत्यु सामने खड़ी हो ,पॉल कलानिधि से सीखें सार्थक जीवन कैसे जिएँ

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withrbansal पॉल कलानिधि - मृत्यु के सामने सार्थक जीवन की खोज, जीवन बदल देने वाली 10 सीख दोस्तों, अगर आपको पता चले कि समय बहुत कम बचा है तो ? कल्पना कीजिए...आपने जीवन के लिए बहुत सारे सपने देखे हैं....आपने पढ़ाई की, मेहनत की, करियर बनाया, परिवार बनाया और भविष्य के लिए योजनाएँ बनाईं। आपको लगता है कि अभी बहुत समय है...रिटायरमेंट के बाद यह करेंगे....कुछ साल बाद यात्रा करेंगे....बच्चों की जिम्मेदारियाँ पूरी होने के बाद अपने लिए जिएँगे......पैसा थोड़ा और हो जाए तो समाज के लिए कुछ करेंगे.....स्वास्थ्य ठीक रहे तो आध्यात्मिक जीवन में आगे बढ़ेंगे। लेकिन एक दिन अचानक डॉक्टर कह दे - “आपको एक गंभीर बीमारी है और आपके पास शायद बहुत अधिक समय नहीं है।” तब क्या होगा ? क्या हमारी प्राथमिकताएँ वही रहेंगी ? क्या पैसा उतना ही महत्वपूर्ण लगेगा ? क्या पद, प्रतिष्ठा, मकान, गाड़ी और सामाजिक पहचान पहले जैसी महत्वपूर्ण रहेंगी ? नहीं ना | ऐसे में उठता है वह सबसे बड़ा प्रश्न - अगर जीवन छोटा हो जाए तो उसे सार्थक कैसे बनाएँ ? अमेरिका के युवा न्यूरोसर्जन " डॉ. पॉल कलानिधि " का जीवन इसी प्रश्न के सामने खड़ा...

जब लगे कि जीवन में कोई रास्ता नहीं बचा… तब रुकिए ....कहानी अभी खत्म नहीं हुई है |

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withrbansal           आत्महत्या क्यों ? जब जीवन असहनीय लगे तब यह लेख जरूर पढ़ें   Suicide के Spiritual और Practical Aspects  - शायद यह लेख किसी एक जिंदगी को बचा दे  “कभी-कभी इंसान जिंदगी ख़त्म नहीं करना चाहता… वह केवल उस दर्द से मुक्त होना चाहता है जिसे वह और सहन नहीं कर पा रहा।” शायद आत्महत्या को समझने की शुरुआत यहीं से होनी चाहिए। अगर आज आपको भी लगता है कि सब कुछ खत्म हो गया है, तो बस एक पल रुकिए… हो सकता है आपकी जिंदगी का सबसे खूबसूरत अध्याय अभी लिखा ही न गया हो। याद रखिए - एक कठिन परिस्थिति पूरी जिंदगी का फैसला नहीं होती। कहानी अभी खत्म नहीं हुई है। 🚨 यदि आप अभी तत्काल खतरे में हैं -  दोस्त , यदि आपके मन में अभी आत्महत्या करने या स्वयं को नुकसान पहुँचाने का विचार आ रहा है, तो अभी कोई अंतिम निर्णय न लें और अकेले न रहें और -  तुरंत किसी भरोसेमंद व्यक्ति को बताइए कि - “ मेरे मन में आत्महत्या के विचार आ रहे हैं, कृपया मेरे साथ रहें।”.... ऐसी जगह या वस्तुओं से दूर हो जाइए जिनसे आप स्वयं को नुकसान पहुँचा सकते हैं। @ भारत में Tele-MANAS: 14...

हर इंसान की अपनी एक संजीवनी होती है: हनुमान जी से सीखिए संकट में जीवन को फिर से कैसे खड़ा करें |

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withrbansal संजीवनी बूटी का रहस्य: क्या मृत्यु को हराने से भी बड़ा था उसका जीवन संदेश ? दोस्तों, जीवन में हर व्यक्ति कभी न कभी ऐसी परिस्थिति में अवश्य पहुँचता है, जहाँ उसे लगता है कि अब सब कुछ समाप्त हो गया। उसी क्षण उसे अपनी 'संजीवनी' खोजनी होती है l  याद करें रामायण का वह प्रसंग जब भगवान राम भी असहाय दिखाई दिए…रामायण का यह प्रसंग केवल युद्ध का वर्णन नहीं है, बल्कि मानव जीवन की सबसे बड़ी सच्चाई का प्रतीक भी है। लंका का युद्ध अपने निर्णायक मोड़ पर था। धर्म और अधर्म आमने-सामने खड़े थे। तभी रावण का पुत्र मेघनाद अपनी दिव्य शक्ति का प्रयोग करता है। उसका शक्तिबाण लक्ष्मण को गंभीर रूप से घायल कर देता है। लक्ष्मण भूमि पर गिर पड़ते हैं। उनका शरीर निश्चेष्ट है। श्रीराम अपने प्रिय भाई का सिर गोद में रखे बैठे हैं। पहली बार ऐसा लगता है मानो स्वयं भगवान भी एक भाई के दुःख से व्याकुल हो उठे हों। इसी समय वैद्य सुषेण कहते हैं - "यदि सूर्योदय से पहले संजीवनी औषधि नहीं पहुँची, तो लक्ष्मण को बचाना अत्यंत कठिन होगा।" बस यही वह क्षण था जिसने इतिहास बदल दिया। हनुमान जी बिना एक क्षण गँवाए द्...

ईश्वर आपको कष्ट क्यों देता है ? संघर्ष का वह रहस्य जो आपकी पूरी सोच बदल देगा |

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withrbansal           क्या वाकई मे जीवन मे आने वाली समस्याएं हमें तोड़ती है ?     दोस्तों, उस दिन नदी के किनारे लौटते समय हवा पहले जैसी ही थी, पानी पहले जैसा ही बह रहा था, पक्षी पहले जैसे ही गा रहे थे। बदल गया था तो केवल मेरा दृष्टिकोण। मेरे भीतर एक प्रश्न बार-बार उठ रहा था - यदि जीवन का उद्देश्य स्वयं को गढ़ना है, तो फिर जीवन में इतना संघर्ष क्यों है?  यदि आपने इस श्रंखला का पहला भाग नहीं पढ़ा है तो पहले यह अवश्य पढ़े -  जब सब कुछ बदल रहा हो, तब आपको क्या गढ़ना चाहिए ? क्यों कोई व्यक्ति जन्म से ही अभावों में पलता है, जबकि किसी के पास सब कुछ होता है ? क्यों किसी का हृदय प्रेम में टूटता है, किसी का शरीर बीमारी से, किसी का आत्मविश्वास असफलताओं से और किसी का मन अकेलेपन से ?यदि ईश्वर करुणामय है, यदि प्रकृति हमारी मित्र है, तो फिर जीवन हमें इतनी कठिन राहों से क्यों गुज़ारता है? यह प्रश्न केवल मेरा नहीं है, यह हर एक उस मनुष्य का प्रश्न है जिसने कभी जीवन में आँसू बहाए हैं। वर्षों तक मैंने इसका उत्तर पुस्तकों में खोजा। उपनिषदों को पढ़ा, श्रीमद्भगवद्गीत...