धन, घर और सफलता सब मिल जाएँ... फिर भी लोग दुखी क्यों रहते हैं ?
withrbansal जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि - आपने कितना पाया नहीं, बल्कि आप क्या बन गए ! दोस्तों, मनुष्य का सबसे बड़ा भ्रम यह है कि वह सोचता है - 'बस यह मिल जाए, फिर मैं खुश हो जाऊँगा।' लेकिन जीवन का सबसे बड़ा सत्य यह है कि खुशी पाने से नहीं, बनने से आती है।" क्या हम सचमुच जी रहे हैं या केवल पाने की दौड़ में हैं ? कुछ दिन पहले शाम को नदी किनारे टहलते हुए मेरे मन में एक प्रश्न उठा - हम जीवन भर आखिर किसके पीछे भागते रहते हैं ? बचपन में अच्छे अंक चाहिए थे , फिर अच्छी नौकरी, उसके बाद अपना घर ,फिर बड़ा घर,बच्चों का भविष्य,सम्मान,पैसा, सुरक्षा। घर लौटकर मैंने अपनी वर्षों पुरानी डायरी खोली। हर पन्ने पर कोई-न-कोई लक्ष्य लिखा था - "प्रथम आना है..." "सरकारी नौकरी चाहिए..." "अपना घर बनाना है..." "आर्थिक रूप से स्वतंत्र होना है..." इत्यादि | लेकिन सबसे बड़ी बात जिसने मुझे झकझोर दिया कि पूरी डायरी में कहीं भी यह नहीं लिखा था - "मुझे अधिक धैर्यवान बनना है।" "मुझे ऐसा इंसान बनना है जिस पर लोग भरोसा कर सकें।" "मुझे अपने क्रोध ...