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जीवन की स्क्रिप्ट : कर्म लिखता है या प्रारब्ध ?

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withrbansal            कर्म, भाग्य, प्रारब्ध और  नियति: जीवन की अदृश्य डोरियाँ” दोस्तों , "क्या तुम वह हो, जो तुम्हारा भाग्य कहता है ? या वह, जो हर दिन कर्म से स्वयं को रचता है ?" मानव जीवन की सबसे पुरानी और रहस्यमयी पहेली है — “मैं कौन हूँ, और मेरा जीवन किसके अधीन है ?” क्या मैं एक कठपुतली हूँ, जिसकी डोर नियति के हाथों में है ? या मैं वह चुपचाप जीवन पथ पर चलता वह कलाकार हूँ, जो अपने कर्मों से भविष्य की रंगभूमि को तैयार कर रहा है ? आइए दोस्तों जीवन की इस गूढ पहेली को चार शब्दों -  " कर्म, भाग्य, प्रारब्ध, और नियति " में विभाजित कर समझें l                                           ये शब्द सिर्फ दर्शन नहीं, बल्कि हर व्यक्ति के अंदर चलती सूक्ष्म ऊर्जा की परतें हैं। इन्ही शब्दों पर सम्पूर्ण जीवन का ताना-बाना रचा हुआ है और इन्हें समझे बिना हम इस जीवन रूपी गुत्थी को सुलझा नहीं सकते है |   1 कर्म: गति का बीज- "कर्म " सिर्फ क्रिया नहीं है, य...