“जब लाइफ का सिस्टम हैंग हो जाए, महामृत्युंजय है रीबूट मंत्र !”

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 मृत्यु एक 'सॉफ्टवेयर एरर' है और "महामृत्युंजय "उसे ठीक करने का अंतिम 'वैदिक पैच'!

दोस्तों, इतिहास के पन्नों में एक ऐसे 'पासवर्ड' का जिक्र मिलता है जो प्रकृति के सबसे कठोर कानून - मृत्यु, को भी चुनौती देने का दम रखता है। कल्पना कीजिए एक ऐसी ध्वनि की, जो यदि सही आवृत्ति (Frequency) पर ब्रह्मांड से टकराए, तो वह केवल शब्द नहीं रह जाती, बल्कि एक 'लाइफ-इंजीनियरिंग टूल' बन जाती है।

जिसे हम सदियों से एक पारंपरिक धार्मिक श्लोक मानकर रटते आए हैं, वह असल में ऋग्वेद के 7वें मंडल का वह 'एडवांस सर्वाइवल प्रोटोकॉल' है, जिसे ऋषि वशिष्ठ ने संकलित किया और असुर गुरु शुक्राचार्य ने सिद्ध किया। जी हाँ हम बात कर रहें है उस साउंड इंजीनियरिंग' के उस महाकोड़ की, जिसे दुनिया 'महामृत्युंजय' के नाम से जानती है और जिसने काल के पहिये को भी उल्टा घुमाने की क्षमता दिखाई है l 

देवासुर संग्राम के दौरान जब देवता अपनी नीति से असुरों पर भारी पड़ रहे थे, तब असुरों के गुरु शुक्राचार्य ने एक ऐसी गुप्त शक्ति प्रयुक्त की, जिसने देवताओं के सिंहासन को हिला दिया था और वह थी- "मृत-संजीवनी विद्या' "

प्राचीन लोकप्रिय कथाओं में "संजीवनी" को मृत व्यक्ति को पुनः जीवित कर देने वाली एक जड़ी-बूटी माना गया है, लेकिन आज के विज्ञान के अनुसार यह एक "साउंड वेव " थी। शुक्राचार्य यह जानते थे कि मृत्यु शरीर का अंत नहीं, बल्कि शरीर की ऊर्जा का डि-ट्यून' (De-tune) हो जाना है।


जैसे एक रेडियो स्टेशन से सिग्नल हट जाए तो केवल शोर सुनाई देता है, वैसे ही शरीर से प्राणों का सिग्नल हटने पर शरीर मृत हो जाता है। "महामृत्युंजय मंत्र " उसी सिग्नल को पुनः स्थापित करने का ब्रॉडकास्ट कोड' है। जब शुक्राचार्य मंत्र पढ़ते थे, तो वातावरण में ऐसी लहरें पैदा होती थीं जो मृत शरीर के ठंडे पड़ चुके 'सेल्स' को 'जंप स्टार्ट' (Jump Start) कर देती थीं।

महामृत्युंजय मंत्र-  
                           त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। 
                      उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

इस मंत्र का शाब्दिक अर्थ है - 
"हम तीन नेत्रों वाले भगवान शिव की उपासना करते हैं, जो सुगंध के समान सर्वत्र व्याप्त हैं और सबका पोषण करने वाले हैं। जैसे पकने पर ककड़ी बेल के बंधन से स्वतः अलग हो जाती है, वैसे ही हमें मृत्यु के बंधन से मुक्त करें, लेकिन अमृत (मोक्ष) से अलग न करें।" 

Lord Shiva meditative form with third eye

💙कोशिकाओ को अकाल मृत्यु से बचाने का निर्देश -'उर्वारुक' कोड - 

इस मंत्र का सबसे रहस्यमयी शब्द है -'उर्वारुक' यानी ककड़ी l जब ककड़ी कच्ची होती है, तो वह अपनी बेल से मजबूती से चिपकी रहती है। उसे जबरदस्ती तोड़ोगे तो बेल और फल दोनों को क्षति होगी। लेकिन जब ककड़ी पूरी तरह 'पक' जाती है, तो वह बिना किसी दर्द के खुद-ब-खुद बेल को छोड़ देती है। 

दोस्तों, जरा सोचे हमारे जीवन में यह "बेल" क्या है, यह बेल है - समय अर्थात टाइम लाइन | हमारा जीवन इस समय रूपी बेल से बंधा हुआ है , जब समय इसे झटके से तोड़ देता है तो वह अकाल मृत्यु कहलाती है जो कि डरावनी होती है | इस मंत्र का " उर्वारूक" शब्द "बायोलॉजिकल इंस्ट्रक्शन" है। यह मंत्र हमारी कोशिकाओं (Cells) को संदेश ( निर्देश ) देता है - "अभी मत टूटो, पहले पूरी तरह पक जाओ।" 

यह मंत्र कोशिकाओं को पकने यानी मैच्योर होने का समय देता है। यह शरीर को समय से स्वतंत्र कर ,अकाल मृत्यु अर्थात समय से पहले मृत्यु से सुरक्षा प्रदान करता है l इसे महामृत्युजय भी इसीलिए कहा जाता है - वह जो काल को भी जीत ले l 

Ripe cucumber detaching naturally from vine




 थर्मोडायनामिक्स के अनुसार ब्रह्मांड की सभी व्यवस्थाओं में विनाश ( अव्यवस्था ) की ओर बढ़ने की प्रवत्ति होती है, जिसे entropy कहा जाता है। मृत्यु इस अव्यवस्था की अधिकतम सीमा है l यह मंत्र entropy प्रक्रिया को रोक कर बिखरती हुई ऊर्जा को वापस केंद्र की ओर खींचता है।

पूरी दुनिया में हर चीज़ ,यहाँ तक कि हमारे शरीर की हर कोशिका लगातार हल्की-हल्की कंपन (वाइब्रेशन) कर रही होती है। जब हम मंत्र बोलते हैं, तो इसके "त्रयम्बकं" शब्द की ध्वनि तरंगें शरीर के अंदर मौजूद पानी पर असर डालती हैं और खास तरह के पैटर्न बनाती हैं - इसे "सिमैटिक्स" कहते हैं।

आसान भाषा में कहें ती मंत्र की आवाज़ शरीर के अंदर ऐसी हलचल पैदा करती है, जो कोशिकाओं को जगा सकती है और उन्हें फिर से सक्रिय करने में मदद कर सकती है।

 💙 33 अक्षरों का क्वांटम एनटैंगलमेंट - 

वैदिक गणना के अनुसार इस मंत्र में 33 अक्षर हैं, जो ब्रह्मांड की 33 'कोटि' ऊर्जाओं के 'एक्सेस कोड' हैं। आधुनिक भौतिकी के 'क्वांटम एनटैंगलमेंट' सिद्धांत के अनुसार, दो कण एक-दूसरे से करोड़ों मील दूर होकर भी जुड़े हो सकते हैं। 

जब हम 'त्रयम्बकं' उच्चारण करते हैं, तो यह हमारे मस्तिष्क के केंद्र में स्थित "पीनियल ग्लैंड "(तीसरी आँख) को हिट करता है। यह ग्लैंड हमारे शरीर का 'एंटीना' है। शुक्राचार्य इस 'एंटीना' के माध्यम से मृत शरीर की बिखरी हुई चेतना को 'ब्रह्मांडीय क्लाउड' (Cosmic Cloud) से वापस खींचकर शरीर के 'हार्डवेयर' में री-इंस्टॉल कर देते थे। यह 'डेटा रिकवरी' का सबसे प्राचीन और शक्तिशाली रूप है।


💙 वाइब्रेशनल एडिटिंग और DNA रिपेयर -  

आज का विज्ञान 'जेनेटिक एडिटिंग' की बात करता है, लेकिन महामृत्युंजय मंत्र 'वाइब्रेशनल एडिटिंग' है। हमारे शरीर की हर कोशिका के अंदर क्रोमोसोम होते हैं, और उनके सिरों पर छोटे-छोटे “कवर” होते हैं जिन्हें टीलोमर्स कहा जाता है। जैसे-जैसे ये टीलोमर्स छोटे होते जाते हैं, हमारी कोशिकाएँ बूढ़ी होने लगती हैं - यानी उम्र बढ़ना शुरू हो जाता है। 

DNA structure and cellular visualization


शरीर में एक एंजाइम होता है, टीलोमरेज, जो इन टीलोमर्स को बचाने या थोड़ा बढ़ाने में मदद करता है, जिससे कोशिकाएँ ज्यादा समय तक स्वस्थ रह सकती हैं। कहा जाता है कि इस मंत्र के सही उच्चारण से बनने वाली ध्वनि-तरंगें (वाइब्रेशन) शरीर में सकारात्मक असर डालती हैं, जो इस एंजाइम को सक्रिय करने में मदद कर सकती हैं और उम्र बढ़ने की गति को धीमा कर सकती हैं।

 इस मंत्र का निरंतर जाप शरीर के चारों ओर एक सुरक्षा घेरा बना देता है, जिसे प्राचीन ग्रंथों में 'कवच' कहा गया है। यह 'ऑरा' को इतना शक्तिशाली कर देता है कि सूक्ष्म जगत के 'डिकेयिंग सिग्नल्स' शरीर में प्रवेश नहीं कर पाते।


💙'सुगन्धिं' और 'मामृतात्' – अमरता का सॉफ्टवेयर पैच  -

मंत्र में 'सुगन्धिं' और "मामृतात् " शब्दो का प्रयोग किया गया है | मंत्र में “सुगन्धिं” शब्द सिर्फ खुशबू की बात नहीं करता, बल्कि यह एक बहुत ही गहरे स्तर की ऊर्जा को दर्शाता है। हर इंसान के शरीर के चारों ओर एक सूक्ष्म ऊर्जा क्षेत्र (Energy Field) होता है, जिसे आम भाषा में “ऑरा” कहा जाता है।

जब शरीर स्वस्थ और संतुलित होता है, तो यह ऊर्जा क्षेत्र शुद्ध, स्थिर और मजबूत रहता है। लेकिन जैसे-जैसे मृत्यु करीब आती है या शरीर कमजोर होता है, तो इस ऊर्जा क्षेत्र में एक तरह की “मेटाबॉलिक सड़न” (Energy Decay) शुरू हो जाती है ,एक ऐसी सूक्ष्म गिरावट, जिसे सामान्य आँखों से नहीं देखा जा सकता, लेकिन वह शरीर के चारों ओर की ऊर्जा को कमजोर कर देती है। 

यहीं “सुगन्धिं” का रहस्य काम करता है। मंत्र के उच्चारण से जो ध्वनि तरंगें (Vibrations) उत्पन्न होती हैं, वे शरीर के इस ऊर्जा क्षेत्र को शुद्ध और मजबूत करती हैं। इसे हम “वाइब्रेशनल परफ्यूम” कह सकते हैं- एक ऐसी अदृश्य सुगंध, जो किसी इत्र की तरह नहीं, बल्कि ऊर्जा के स्तर पर काम करती है। यह “परफ्यूम” उन नकारात्मक, क्षयकारी (Decaying) सिग्नल्स और ऊर्जाओं को दूर रखता है, जो शरीर के प्राणों को कमजोर करने की कोशिश करते हैं l 

 मंत्र के सबसे रहस्यमयी शब्द “मामृतात्”  सिर्फ एक प्रार्थना नहीं है अपितु यह एक “फाइनल कमांड” है।
मंत्र के अंत में “मामृतात्” शब्द ऐसे आता है जैसे किसी प्रोग्राम का आखिरी कोड, जो पूरे सिस्टम को नया निर्देश देता है। हमारे शरीर के DNA में एक “सेल्फ-डिस्ट्रक्ट सिस्टम” होता है, जिसे विज्ञान में "आत्मघाती"  प्रोग्राम (Apoptosis ) कहा जाता है। यह वह प्रक्रिया है जिसमें कोशिकाएं समय आने पर खुद को समाप्त कर देती हैं- यही धीरे-धीरे मृत्यु की ओर ले जाता है।

“मामृतात्” उस सिस्टम के लिए एक “सॉफ्टवेयर पैच” की तरह काम करता है। जब मंत्र का पूरा कंपन शरीर में फैलता है और अंत में “मामृतात्” उच्चारित होता है, तो यह एक आदेश (Command Signal) की तरह कार्य करता है - “रुको… अभी समाप्त मत हो… पुनः सक्रिय हो जाओ।” यही वह बिंदु है जहाँ शुक्राचार्य की विद्या काम करती थी। वे इस ध्वनि के माध्यम से शरीर की उस “डिफॉल्ट प्रोग्रामिंग” (सेल्फ-डिस्ट्रक्ट सिस्टम )  को ओवरराइड कर देते थे, जो मृत्यु की ओर ले जाती है।

मंत्र की यह ध्वनि मृतप्राय कोशिकाओं तक पहुँचकर उन्हें एक “REBOOT SIGNAL” देती थी - और शरीर, जो एक जैविक मशीन है, दोबारा सक्रिय होने लगता था l 

Human aura and cosmic energy field



 " महामृत्युंजय मंत्र " केवल मौत से बचने के लिए की गई कोई प्रार्थना नहीं है, बल्कि यह अधूरेपन से मुक्ति की प्रार्थना है , यह कहता है - “मैं जागरूक होकर जीऊँ, और पूर्ण होकर ही जाऊँ” | विज्ञान जहाँ सवाल पूछना बंद कर देता है, आध्यात्म वहां से अनुभव शुरू करता है। 

शुक्राचार्य कोई जादूगर नहीं थे, वे एक "कॉस्मिक प्रोग्रामर "थे। उन्होंने समझ लिया था कि इंसान केवल मांस का लोथड़ा नहीं, बल्कि 'ध्वनि की एक अनंत लहर' है। आज भी, जब विज्ञान हार मान लेता है, तब इसी मंत्र की वाइब्रेशन उस 'अदृश्य तार' को जोड़ देती है जहाँ से जीवन की बिजली दौड़ती है। 

 दोस्तों, याद रखिएगा, आप मरते इसलिए हैं क्योंकि आप 'समय' से बंधे हैं, और यह मंत्र आपको उस 'समय' के ही पार (Time-Independent) ले जाने की क्षमता रखता है। "मृत्यु अंत नहीं है, बस एक गलत ट्यूनिंग है और महामृत्युंजय उसे 'री-ट्यून' करने का ब्रह्मांडीय कोड है।

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